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दुनिया का सबसे पहला हिजड़ा (किन्नर)

दोस्तों आप लोगों ने किन्नरों के बारे में तो सुना ही होगा आज हम आपको किन्नरों की उत्पत्ति के बारे में बताने वाले हैं ! मनुष्य की तरह किन्नरों के भी दो प्रकार होते हैं एक किन्नर जिन्हें किंपुरुष कहा जाता है और दूसरी किन्नरी जिन्हें किंपुरुषी कहा जाता है ! इन किन्नरों का पहली बार जन्म कैसे और किस वजह से हुआ था आइये जानते हैं इस कहानी के बारे में !

 

बहुत पहले प्रजापति कर्दम के इल नाम का पुत्र था ! यह इल बड़ा ही धर्मात्मा राजा था ! एक बार राजा इल अपने कुछ सैनिकों के साथ वन में शिकार खेलने गए ! कई जानवरों का शिकार करने के बाद भी राजा इल का मन नहीं भरा तो वो शिकार खेलते खेलते उस पर्वत पर पहुंच गए जहां भगवान शिव अपनी पत्नी देवी पार्वती के साथ विहार कर रहे थे ! दोस्तों देवी पार्वती का मन प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने उस समय अपने आप को भी स्त्री बना लिया था ! कहते हैं भगवान शिव के स्त्री रूप धारण करते ही उस पर्वत में मौजूद सभी पुल्लिंग जंतु तथा वृक्ष स्त्रीलिंग हो गए थे ! इसलिए उस वन में शिकार खेल रहे राजा इल और उनके सारे सैनिक भी स्त्री बन गए अपने आप को स्त्री के रूप में देख राजा इल को बड़ा दुख हुआ और जब उन्हें यह पता चला कि यह सब भगवान शिव की इच्छा से हुआ है तो वह और भी भयभीत हो गए और फिर वह भगवान शिव की शरण में जा पहुंचे तब उन्हें देख भगवान शिव ने स्त्री बने राजा इल से कहा की पुरुषत्व छोड़ कर जो भी वर मांगना चाहो मांग लो !

 

जब भगवान शिव ने राजा इल को पुरुषत्व का वर देने से इंकार कर दिया तब राजा इल ने उनसे कोई दूसरा वर नहीं मांगा और वह देवी पार्वती को प्रसन्न करने में लग गए ! तब देवी पार्वती ने राजा इल से प्रसन्न होकर कहा की तुम जो पुरुषत्व प्राप्ति का वर चाहते हो उसके आधे भाग के दाता तो महादेव जी हैं मैं तुम्हें सिर्फ पुरुषत्व का आधा भाग ही दे सकती हूं यानी तुम अपना आधा जीवन पुरुष बन कर रह सकते हो और अपना आधा जीवन तुम्हें स्त्री बनकर ही व्यतीत करना होगा ! अतः तुम कब इस्त्री रुप में रहना चाहते हो और कब पुरुष रूप में रहना चाहते हो वह मुझे बताओ ! तब राजा इल ने बड़ा ही सोच समझकर पार्वती जी से यह कहा कि मैं एक माह स्त्री के रुप में रहूं और एक माह पुरुष के रुप में रहूंगा ! राजा हिल की यह बात सुनकर देवी पार्वती ने तथास्तु कहते हुए राजा इल से यह भी कहां की जब तुम पुरुष रूप में रहोगे उस समय तुम्हें अपने स्त्री जीवन का कुछ भी याद नहीं रहेगा और जब तुम स्त्री रूप में रहोगे है तब तुम्हें अपने पुरुष जीवन के बारे में कुछ भी याद नहीं रहेगा !

 

इस तरह राजा इल तो एक माह स्त्री इला और एक माह पुरुष इल होने का वरदान पा गए थे परंतु राजा इल के सारे सैनिक उसी तरह स्त्री रूप में ही रह गए थे बताते हैं कि एक बार वह सारे सैनिक अपने स्त्री रूप में इला के साथ विचरण करते हुए चंद्रमा के पुत्र महात्मा बुद्ध के आश्रम में पहुंच गए थे तब बुद्ध जी ने उन स्त्री रुपी सैनिकों से यह कहा था कि तुम सब किंपुरुषी इस पर्वत पर अपना निवास स्थान बना लो आगे चलकर तुम सब सभी स्त्रियां किंपुरुष पतियों को प्राप्त करोगी बुद्ध की यह बात सुनकर वह सभी स्त्री रुपी सैनिक उस पर्वत पर रहने लगी थी दोस्तों किन्नरों की उत्पत्ति का पूरा विवरण वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में बड़े ही स्पष्ट रूप में से लिखा हुआ है !

 
दुनिया का सबसे पहला हिजड़ा (किन्नर) – देखें विडियो

 
Featured image taken from Google

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